इंजील शरीफ

हम सब हक़ीक़त की तलाश में हैं हम में से बाअज़ लोगों ने इस हक़ीक़त को पा लिया है और बाक़ी इस जुस्तजू को जारी रखे हुए हैं आप ये तो जानते ही होंगे कि इस कायनात की सबसे बड़ी हक़ीक़त ख़ुद ख़ुदा है। अगर हम तमाम उलूम हासिल कर लें लेकिन ज़ात-ए-बारी तअला से लाइल्म रहें तो हमें कछु फ़ायदा नहीं। लेकिन इस के साथ साथ ये भी हक़ीक़त है कि हम महदूद इन्सान अपने महदूद इल्म और महदूद ज़हन के साथ ख़ुदा को जो लामहदूद है जान नहीं सकते पस लाज़िम है कि ख़ुदा ख़ुद अपने आपको हम पर ज़ाहिर करे और इस ने ऐसा किया भी चुनान्चे इस ने मुख़्तलिफ़ औक़ात (वक़्तों) में, मुख़्तलिफ़ मुक़ामात पर मुख़्तलिफ़ लोगों को चुना ताकि उन के ज़रीये अपने आपको ज़ाहिर करे ये लोग जिन्हें ख़ुदा ने अपने आपको ज़ाहिर करने के लिए चुना अम्बिया कहलाए। ख़ुदा के इन बर्गुज़ीदा बंदों ने इस के पैग़ाम को लोगों तक ज़बानी और तहरीरी दोनों सूरतों में पहुंचाया वुह मुतअद्दिद किताबें जो इन अम्बिया-ए-किराम की मार्फ़त हम तक पहुंची हैं, उन के मजमूआ को हम किताब-ए-हयात या बाइबल कहते हैं।