हज़रत मुहम्मद

हज़रत मुहम्मद साहब दुनिया की नामवर हस्तीयों में से हैं। जिस तरह हिन्दुस्तान को महातमा बुद्ध के वजूद पर। ईरान ज़रतुशत और चीन कनफ़ूशीस के वजूद पर और बनी इस्राईल को हज़रत मूसा के वजूद पर बजा फ़ख़्र है। इसी तरह सरज़मीन अरब को हज़रत मुहम्मद के वजूद पर फ़ख़्र है। आपकी ज़ात से जो फ़्यूज़ अहले अरब को पहुंचे वो तारीख़ के वर्क़ों पर आब-ए-ज़र से लिखे हुए हैं। आपने अरब के मुख़्तलिफ़ क़बीलों को जो एक दूसरे से बरसर-ए-पैकार रहते थे। एक जमाअत में मुनज़्ज़म कर दिया। और दश्त-ए-अरब में एक ऐसे मज़्हब की बुनियाद डाली जिसने अरब में शिर्क और कुफ़्र का ख़ातिमा कर दिया और अब दौर-ए-हाज़रा में मुख़्तलिफ़ ममालिक में फैल गया है। इस मज़्हब के पैरौओं की तादाद करोड़ों पर मुश्तमिल है। पस हर शख़्स का फ़र्ज़ है इस नामवर हस्ती के सवानिह हयात से वाक़िफ़ हो।