सर सय्यद अहमद ख़ान बहादुर की गलतीयां चंद क़ाबिल एतराज़

ये कि फ़िक़्रह का हद ममनू मुंदरजा बाब 3 आयत 22 किताब मुसम्मा बह पैदाइश मूसवी में जुम्ला ममनूअ् के दाख़िल कलिमा नू के मअनी उस यानी ज़मीर वाहिद ग़ायब के भी हो सकते,

नजात नेक-आमाल के साथ नामुम्किन

मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नमीर, अबी आमिश, अबू सालिह हज़रत अबू हुरैरा रज़ीअल्लाह तआला अन्हो से रिवायत है कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया मियाना

मौलवी इस्माईल और शिर्क की ताअलीम

“ख़ुदा उस के गुनाह को नहीं बख़्शेगा कि किसी को उस का शरीक बनाया जाये, और इस के सिवा (और गुनाह) जिसको चाहेगा बख़्श देगा। और जिसने ख़ुदा के साथ शरीक बनाया वो रस्ते से दूर जा पड़ा।”

ऐ आदमी ! तेरे गुनाह माफ़ हुए

“ऐ आदमी ! तेरे गुनाह तुझे माफ़ हुए।” (लूक़ा 5:20) ये कौन है जिसके इस कलाम पर फ़क़ीह और फ़रीसी ख़्याल करने लगे कि, “ये कौन है जो कुफ़्र (बेदीनी के अल्फ़ाज़)

दुनिया का नूर

“दुनिया का नूर मैं हूँ।” ये दाअ्वा ऐसा भारी है कि जिसको बादियुन्नज़र (पहली नज़र) किसी इन्सान ख़ाकी बनयान (पोशाक) की ज़बान से सुनते ही ये ख़्याल पैदा हो सकता है कि मुद्दई दीवाना या फ़रेबी या फ़रेब ख़ूर्दा है।

तौरेत व क़ुरआन के सरीह मुख़ालिफ़ वाक़ियात

तफ़्सीर कादरी तर्जुमा तफ़्सीर हुसैनी में लिखा है कि, हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम के क़िस्से में और ऊरियाह की औरत के साथ आप के निकाह करने में बहुत इख़्तिलाफ़ है।

और उस औरत से कहा

नूर-अफ़्शां मतबूआ 16 अप्रैल के ऐडीटोरीयल कालम में नाज़रीन ने पढ़ा होगा कि ख़ुदावंद मसीह ने यही बात एक मफ़लूज आदमी के हक़ में ज़बान मुबारक से फ़रमाई थी, “तेरे गुनाह तुझे माफ़ हुए।” और वो शमाउन फ़रीसी के घर में उस ताइब व शिकस्ता-दिल (गुनाह से पलटने वाला टूटा हुआ दिल) औरत को भी, जो उस की ख़बर सुनकर वहां पहुंची और तौबा

क्योंकि तेरी नस्ल इज़्हाक़ से कहलाएगी

मुस्लिम भाई साहिबान मसीहीयों के सामने दीनी गुफ़्तगु में इब्राहिम के बेटे इस्माईल की बड़ी क़द्रो-मंजिलत बयान किया करते हैं। बल्कि इस बात पर निहायत फ़ख़्र करते हैं कि इस्माईल के ख़ानदान से नबी अरब पैदा हुए और कि ख़ुदा ने उनको वो इज़्ज़त और मर्तबा इनायत फ़रमाया है कि जो किसी दूसरे नबी को हासिल नहीं हुआ। और ये कि मुहर-ए-नबूव्वत उन्हीं पर ख़त्म हुई वग़ैरह।

उस के आने का वाअ़दा कहाँ?

नाजरीन कलीसिया ने चार इतवार मुक़र्रर किए हैं ताकि मसीह की दूसरी आमद की यादगारी व तैयारी हो। सबब इस का ये है कि इन्सान ग़ाफ़िल रहते और सो जाते हैं। और चार इतवार चार घंटों के मुवाफ़िक़ हैं कि अगर हम पहले दूसरे व तीसरे घंटे सो रहे हैं तो चौथे घंटे में जाग जाएं। यहां पतरस रसूल मसीह की दूसरी आमद का ताकीदन ज़िक्र करता

अस्ल ख़ुशी क्या है?

अगर बनज़र ग़ौर देखा जाये तो ज़ाहिरी ख़ुशीयां जिनकी तरफ़ हर एक इन्सान रग़बत और ख़्वाहिश से देखता है और उस के हासिल होने पर नाज़ाँ व फ़रहां होता है। दौलत, इज़्ज़त, औलाद, उम्र दराज़ी और तंदरुस्ती ठीक है, इनके मिलने से दुनियावी आराम मिल सकते हैं। दौलत जिस इन्सान के पास होती है वो उम्दा मकान रिहाइश के वास्ते बनाता है,