क्योंकि तेरी नस्ल इज़्हाक़ से कहलाएगी

मुस्लिम भाई साहिबान मसीहीयों के सामने दीनी गुफ़्तगु में इब्राहिम के बेटे इस्माईल की बड़ी क़द्रो-मंजिलत बयान किया करते हैं। बल्कि इस बात पर निहायत फ़ख़्र करते हैं कि इस्माईल के ख़ानदान से नबी अरब पैदा हुए और कि ख़ुदा ने उनको वो इज़्ज़त और मर्तबा इनायत फ़रमाया है कि जो किसी दूसरे नबी को हासिल नहीं हुआ। और ये कि मुहर-ए-नबूव्वत उन्हीं पर ख़त्म हुई वग़ैरह।

उस के आने का वाअ़दा कहाँ?

नाजरीन कलीसिया ने चार इतवार मुक़र्रर किए हैं ताकि मसीह की दूसरी आमद की यादगारी व तैयारी हो। सबब इस का ये है कि इन्सान ग़ाफ़िल रहते और सो जाते हैं। और चार इतवार चार घंटों के मुवाफ़िक़ हैं कि अगर हम पहले दूसरे व तीसरे घंटे सो रहे हैं तो चौथे घंटे में जाग जाएं। यहां पतरस रसूल मसीह की दूसरी आमद का ताकीदन ज़िक्र करता

अस्ल ख़ुशी क्या है?

अगर बनज़र ग़ौर देखा जाये तो ज़ाहिरी ख़ुशीयां जिनकी तरफ़ हर एक इन्सान रग़बत और ख़्वाहिश से देखता है और उस के हासिल होने पर नाज़ाँ व फ़रहां होता है। दौलत, इज़्ज़त, औलाद, उम्र दराज़ी और तंदरुस्ती ठीक है, इनके मिलने से दुनियावी आराम मिल सकते हैं। दौलत जिस इन्सान के पास होती है वो उम्दा मकान रिहाइश के वास्ते बनाता है,

क़ुरआन कि बाबत एक आलिम अरब की राय

ख़लीफ़ा मामून के अहद में जो जवाब अब्दुल्लाह वल्द इस्माईल हाश्मी को अब्दुल मसीह वल्द इस्हाक़ किन्दी ने दिया, उस में वो लिखता है कि, मसीही राहिबों में (राहिबान के तरीक़े का यहां बयान कुर्बा ज़रूरी नहीं) सर जेविश नामी एक शख़्स था, जिस से कोई ना-मुलाएम (सख़्त) हरकत सरज़द हुई जिसके सबब मसीही जमाअत ने

आदम की पैदाइश और क़ुरआन

सूरह अल-बक़र रुकूअ़ 3 में पैदाइश आदम की बाबत लिखा है, “और जब कहा तुम्हारे रब ने वास्ते सब फ़रिश्तों के कि “बेशक में पैदा करने वाला हूँ ज़मीन में एक ख़लीफ़ा” तो मलाइका ने उस से कहा “क्या पैदा करता है तू ज़मीन में उसे जो फ़साद करे उस में और ख़ूँरेज़ी करे?” तफ़्सीर में लिखा है कि इस बात से फ़रिश्तों की वाक़फ़ीयत

वाक़ियात तौरेत व क़ुरआन में सरीह मुख़ालिफ़त

तफ़्सीर क़ादरी तर्जुमा तफ़्सीर हुसैनी में लिखा है, कि हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम के क़िस्से में और उर्याह की औरत के साथ आपके निकाह करने में बहुत इख़्तिलाफ़ है। बाअज़ मुफ़स्सिरों ने ये क़िस्सा इस तरह बयान किया है कि शराअ और अक़्ल इसे क़ुबूल करने से इन्कार करती है। जो कुछ सेहत के साथ मालूम हो वो ये है कि उर्याह ने एक औरत के साथ

ख़ुलासा अल-मसाईब

ख़ुलासा अल-मसाईब में रिवायत है कि एक रोज़ मुहम्मद साहब हुसैन के गले के बोसे लेते थे तो उन्हों ने पूछा, ऐ नाना क्या बाइस है आप मेरे गले को चूमते हैं? हज़रत रोए और फ़रमाया, ऐ फ़र्ज़न्द मैं इसलिए चूमता हूँ कि एक दिन ये गला ख़ंजर ज़ुल्मो-सितम से काटा जाएगा। हुसैन ने अर्ज़ की, ऐ नाना किस जुर्म व गुनाह पर मुझे क़त्ल करेंगे?

अंजीर की तम्सील

जनाब-ए-मसीह की ये तम्सील बतौरे ख़ास क़ौम यहूद से और बतौरे आम मसीहीयों और ग़ैर-मसीहीयों जुम्ला आदमजा़द से इलाक़ा रखती है। अगरचे हमारे मसीही नाज़रीन ने इस तम्सील को अक्सर इन्जील मुक़द्दस में पढ़ा होगा, लेकिन ग़ैर-अक़्वाम के फ़ायदे के लिए अगर हम अव्वलन तम्सील को पूरा लिखें तो नामुनासिब ना होगा। ख़ुदावंद ने फ़रमाया कि

ऐ हमारे बाप

इस में शक नहीं कि मज़्हब ईस्वी के अलावा दुनिया के अक्सर मज़्हबों में ख़ुदा के बहुत से ज़ाती व सिफ़ाती नाम पाए जाते हैं और उनकी दीनी किताबों में भी ख़ुदा तआला के अक्सर नाम लिखे हुए मौजूद हैं। मुसलमानों में ख़ुदा के 99 यानी निनान्वें नाम अरबी ज़बान में एक वज़ीफ़ा की किताब मौसूमा-बह-जोशन-कबीर में तर्तीबवार लिखे हुए हैं,

मसीहाना उम्मीद

इस बयान का शुरू यूं होता है कि बाद इस के ख़ुदावंद का ग़ुस्सा इस्राईल पर भड़का, कि उसने दाऊद के दिल में डाला कि उनका मुख़ालिफ़ हो के कहे कि जा और इस्राईल और यहूदा को गिन। (2 समुएल 24:1)